आजीवन संस्कृत सेवा अलंकरण

आजीवन संस्कृत सेवा अलंकरण


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दिशा-निर्देश
प्रस्तावना 

यह सम्मान राजस्थान राज्य में जन्मे संस्कृत के उन विशिष्ट योग्य जनों-विद्वानों-साहित्यकारों-भामाशाहों को प्रदान किया जाना है, जिन्होंने आजीवन संस्कृत की कार्यात्मक, रचनात्मक साहित्यिक एवं आर्थिक सेवा की है । यह सम्मान संस्कृत के उन विशिष्ट महानुभावों के सार्वकालिक सहयोग को रेखांकित किए जाने के लिए है, जिसके योगदान के फलस्वरूप संस्कृत का संरक्षण- संवर्धन तथा व्यापक प्रचार-प्रसार हुआ है। जिन्होंने आजीवन संस्कृतभाषा और उसके विविध स्वरूपों को   प्रोत्साहित किया है, तथा उसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलवाई है ।  यह सम्मान उन भाषा सेवियों को प्रदान किया जाना है, जिन्होंने किसी न किसी रूप में आजीवन मन, कर्म और वचन से संस्कृत भाषा की सेवा की है और  संस्कृत भाषा की उन्नति एवं प्रोन्नयन में अपना विशिष्ट योगदान दिया है ।

 

सम्मान का नाम एवं स्वरूप

 इस सम्मान का नाम आजीवन संस्कृत सेवा अलंकरण होगा ।

  • यह सम्मान प्रत्येक वर्ष संस्कृत दिवस के अवसर पर राजस्थान संस्कृत अकादमी द्वारा अधिकतम 11 चयनित व्यक्तियों को प्रदान किया जाएगा ।
  • यह सम्मान जीवित अथवा मरणोपरांत भी प्रदान किया जा सकेगा । मरणोपरांत सम्मान की स्थिति में प्राथमिकता पर पत्नी अथवा पत्नी द्वारा नामित पुत्र अथवा पुत्री सम्मान प्राप्त किए जाने के अधिकारी होंगे ।
  • इस सम्मान के अन्तर्गत सम्मानित होने वाले व्यक्ति/महानुभावों को अकादमी द्वारा ताम्रपत्र,शॉल एवं अकादमी का प्रकाशन (अधिकतम 11 पुस्तकें) प्रदान किया जाएगा ।
  • सम्मानित होने वाले व्यक्ति को राजस्थान संस्कृत अकादमी की पत्रिका स्वरमंगला की नि:शुल्क आजीवन सदस्यता प्रदान की जाएगी।
  • अकादमी द्वारा सम्मानित विद्वान की जीवनी एवं योगदान को अकादमी के सोशल मीडिया पोर्टल पर सार्वजनिक रूप से संप्रदर्शित किया जाएगा।
पात्रता
  • वह व्यक्ति; जो राजस्थान का मूल निवासी हो ।
  • वह व्यक्ति; जिसकी आयु 65 वर्ष या इससे अधिक हो। मरणोपरांत सम्मान में भी आयु सीमा 65 वर्ष ही लागू होगी ।
  • वह व्यक्ति जिसने अपने जीवन काल में संस्कृत भाषा संरक्षण-संवर्धन-प्रचार-प्रसार-प्रोत्साहन-प्रोन्नति हेतु किसी भी प्रकार अपना रचनात्मक,  कार्यात्मक,   कलात्मक, साहित्यिक-सांस्कृतिक, आर्थिक तथा अपना कौशलगत विशिष्ट एवं श्रेष्ठ प्रदान किया हो। जिसका आमजन -संस्कृत प्रेमियों को व्यापक लाभ मिला हो ।
  • संस्कृतभाषा संबंधी किसी भी प्रकार की गतिविधि को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान मिली हो।
चयन प्रक्रिया 
  • अकादमी के अध्यक्ष अथवा प्रशासक द्वारा इस हेतु एक 5 सदस्य समिति का गठन किया जाएगा। 5 सदस्यों में अकादमी निदेशक इसके पदेन सदस्य सचिव होंगे।
  • शेष चार सदस्यों की एक समिति का गठन अकादमी अध्यक्ष /प्रशासक द्वारा किया जाएगा । इस समिति में राजकीय सेवा में कार्यरत संस्कृत विज्ञों को भी सम्मिलित किया जा सकेगा ।
  • अकादमी द्वारा यथासमय सोशल /प्रिंट/इलेक्ट्रॉनिक मीडिया/व्यक्तिगत अथवा चयन समिति के सुझाव-परामर्श अथवा माध्यम से cv/ बायोडाटा संकलित किये जाएंगे ।
  • पर्याप्त संकलन के पश्चात चयन समिति की बैठक आयोजित जाएगी । चयन समिति सकारण अपनी स्पष्ट अभिशंषा कार्यवाही विवरण तैयार कर  अनुमोदन हेतु अकादमी अध्यक्ष अथवा प्रशासक के पास भेजेगी ।
  • 5 सदस्यों में मतभेद होने की स्थिति में अंतिम निर्णय अध्यक्ष अथवा प्रशासक का मान्य होगा । सामान्यरूप से सर्वसम्मति अथवा बहुमत के आधार पर ही निर्णय स्वीकार्य होगा ।
  • चयन समिति में उपस्थित 5 सदस्यों में से वरिष्ठ व्यक्ति ही चयन समिति की अध्यक्षता करेगा ।
  • चयन समिति यह सुनिश्चित करेगी कि संस्कृत से संबंधित सभी श्रेणियों- विधाओं -विषयों में यह सम्मान प्राप्त हो।
वित्तीय निहितार्थ 
  • आयोजन पर होने वाला समस्त व्यय राजस्थान संस्कृत अकादमी के नियमित बजट मद( गैर संवेदन मद) से वहन किया जाएगा ।
  • सम्मानित व्यक्ति को स्वयं एवं उसकी धर्मपत्नी का यात्रा- परिवहन एवं आवासीय व्यय राजस्थान संस्कृत अकादमी द्वारा वहन किया जाएगा। सम्मानित व्यक्ति को प्रथम श्रेणी यात्रा अथवा टैक्सी अथवा विशेष परिस्थितियों में वायुयान यात्रा अनुमत होगी ।

 चयन समिति के सदस्यों का  यात्रा (द्वितीय श्रेणी एसी ) स्थानीय परिवहन एवं आवासीय व्यय भी राजस्थान संस्कृत अकादमी द्वारा वहन किया जाएगा

 समारोह का स्वरूप 
  • समारोह यथासंभव राजधानी मुख्यालय पर ही यथा निर्णय यथा सुविधा आयोजित किया जाएगा ।
  • समारोह में यह सम्मान माननीय राज्यपाल महोदय/माननीय मुख्यमंत्री/ माननीय मंत्री /विधानसभा अध्यक्ष/ अथवा जगतगुरु स्तर के महानुभाव से प्रदान कराया जावेगा ।
  • समारोह में राज्य के संस्कृत विद्वानों के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों के साहित्यकारों, पत्रकारों, कलाकारों, संस्कृत शिक्षण संस्थाओं, स्वैच्छिक संगठनों मान्यता प्राप्त संगठनों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जाएगा।
  • समारोह की वीडियोग्राफी- फोटोग्राफी कराई जाएगी तथा उसका अभिलेख अकादमी के पास सुरक्षित रखा जाएगा ।
निष्कर्ष 

आज़ादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत यह नवाचार प्रारंभ किया जा रहा है । इससे  न केवल उन लोगों के अमूल्य योगदान को रेखांकित किया जाएगा, जिन्होंने अपना सर्वस्व संस्कृत को समर्पित कर दिया है, अपितु इससे आने वाली पीढ़ी भी प्रोत्साहित होगी और संस्कृत के प्रति कार्य करने को प्रतिबद्ध होगी ।

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