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पं. जीवनाथ ओझा

Sanskrit Surya

पं. जीवनाथ ओझा

भारतविश्रुत महाराज संस्कृत कालेज की प्राचीन विद्वत् परम्परा में उल्लेखनीय श्री जीवनाथ ओझा उक्त महाविद्यालय के प्रारम्भिक अध्यापकों में से एक थे। महाविद्यालय के प्राचीन रिकार्ड सन् 1870 ईस्वी में आपका नाम उपलब्ध होता है। मूलतः आप न्यायशास्त्र के प्राध्यापक थे। आपने 30 मई 1908 तक (43 वर्ष तक) अध्यापन किया था। ‘गुरूणां गुरु’ एवं ‘शास्त्रार्थ महारथी’ के रूप में विश्रुत श्री ओझा म.म.पं. गिरिधर शर्मा चतुर्वेदी आदि अनेक विश्रुत विद्वानों के विद्या एवं दीक्षा गुरु रहे हैं। इन्होने व्युत्पत्तिवाद पर टीका लिखी थी। राजवैद्य श्री कृष्णराम भट्ट ने आपका स्मरण इस प्रकार किया है-

षटशास्‍त्रशिक्षाकुशलेन येन

व्युत्पत्तिवादे समकारि टीका।

पाण्डित्यसीमा स गुरुर्गुरूणां

श्रीजीवनाथो बुधवृन्दवन्द्यः।।‘‘

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